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कांग्रेस MLAs की ‘जिला पाॅलिटिक्स’, बजट से पहले गहलोत की बढ़ी परेशानी

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राजस्थान में बजट सत्र से पहले नए जिले बनाने की राजनीतिक लॉबिंग तेज हो गई है। कांग्रेस के कई विधायक और संगठन अपने-अपने क्षेत्र को जिला बनाने के की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए है। सीकर जिले के नीमकाथाना को जिला बनाने की मांग को लेकर विधायक सुरेश मोदी ने राजधानी जयपुर नें प्रदर्शन किया। जबकि बाड़मेर के बालोतरा को जिला बनाने के लिए विधायक मदन प्रजापत ने प्रदर्शन किया। मदन प्रजापत अपनी मांग को लेकर लंबे समय से पैदल चल रहे है। गृह राज्यमंत्री राजेंद्र यादव कोटपूतली को जिला बनाने की मांग को लेकर मंत्री पद छोड़ने की धमकी दे चुके है। रामलुभाया कमेटी की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, ऐसे में विधायक को बजट सत्र से आस है। चुनाव नजदीक आते ही यह मांग और ज्यादा तेज हो गई है। बजट से पहले सीएम गहलोत के सामने नई चुनौती आ गई है। सबसे ज्यादा जिला बनाने की मांग कांग्रेस विधायक ही कर रहे हैं। सीएम गहलोत ने नए जिला बनाने को लेकर पूर्व आईएएस रामलुभाया की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है।

राजस्थान में कांग्रेस विधायकों ने बजट सत्र से पहले नए जिला बनाने की मांग को लेकर जयपुर में विरोध-प्रदर्शन कर सीएम गहलोत पर दबाव बनाने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि सीएम गहलोत बजट सत्र में नए जिला बनाने की मांग पूरी कर सकते हैं। प्रदेश के सभी 33 जिले हैं और नए जिले बनाने को लेकर गठित राज्य स्तरीय कमेटी मंथन कर रही है। इस कमेटी को प्रदेश भर में करीब 60 नए जिलों के संबंध में ज्ञापन प्राप्त हुए हैं। यह कमेटी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को रिपोर्ट पेश करेगी। चूंकि अब राजस्थान की राजनीति चुनावी वर्ष में प्रवेश करने वाली है, तो बहुत से विधायकों के बीच अपने-अपने इलाकों को जिला घोषित करवाने का संघर्ष और तेज होगा, जिसकी शुरुआत झुंझुनूं व सीकर जिलों में हो ही गई है। इनसे पहले बालोतरा (बाड़मेर) से कांग्रेस के विधायक मदन प्रजापत ने डेढ़ वर्ष पहले बालोतरा को जिला बनाने की मांग को लेकर विधानसभा में ही अपने जूते त्यागने की सौगंध ले ली थी, जिसे वे अब तक निभा रहे हैं। वे बिना जूते पहने ही कहीं पर भी आते-जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के कार्यकाल में वर्ष 2008 में प्रतापगढ़ नया जिला बना था। इसके बाद प्रदेश में कोई नया जिला नहीं बनाया गया। प्रदेश में वर्ष 2008 में पूर्ववर्ती काफी सालों से कई जिलों के लोग नए जिले बनाने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गहलोत सरकार प्रदेश में नए जिलों के गठन की तैयारी कर रही है।  राज्य सरकार आगामी बजट में करीब आधा दर्जन जिलों की घोषणा कर सकती है, जिनमें कोटपूतली, बालोतरा, फलोदी, डीडवाना, ब्यावर और भिवाड़ी जैसे कस्बे शामिल हैं। बता दें, साल 2022 के बजट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नए जिलों के गठन के लिए हाईपावर कमेटी बनाने की घोषणा की थी, इसके बाद 17 मार्च को रामलुभाया की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। छह महीने में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन सितंबर में कमेटी का कार्यकाल पूरा हो गया। बाद में इसे मार्च 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया।

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