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कर्नाटक की राजनीति में 8वें गौड़ा की एंट्री, JD(S) ने कहा- कोई भी चुनाव लड़ सकता है

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पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा की नेतृत्व वाली जनता दल (सेक्युलर) पार्टी को अक्सर ‘अप्पा-मक्कलु’ (पिता और बच्चों) वाली पार्टी भी कहा जाता है. और उनकी बहू भवानी रेवन्ना द्वारा खुद को 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए हासन में खुद को पार्टी के उम्मीदवार के रूप में घोषित करना क्षेत्रीय संगठन के लिए इन आरोपों को दूर करना और मुश्किल बना देगा.

हालांकि, जेडी(एस) ने अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. पार्टी ने कहा कि हासन के लिए उम्मीदवार पर फैसला लेने से पहले वह सभी हितधारकों से परामर्श करेंगे.

भवानी गौड़ा परिवार में शामिल होने वाली आठवीं सदस्य होंगी – जो राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नेहरू-गांधी के बाद राज्य की राजनीति में प्रवेश करेंगी. कर्नाटक में चुनावी वंशवाद की एक गहरी संस्कृति को जोड़ने के लिए यह दूसरे नंबर पर हैं.

हासन में मंगलवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘पिछली बार हासन विधानसभा क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास चला गया था और कई (सार्वजनिक) काम हैं जो अभी भी अधूरे हैं. अगले 90 दिनों के भीतर चुनाव खत्म हो जाएंगे, इस मौके पर हर कोई मेरी उम्मीदवारी की बात कर रहा है और उन्होंने (पार्टी ने) यह फैसला भी कर लिया है. अगले कुछ दिनों में, पार्टी मेरी उम्मीदवारी भी घोषित कर देगी.’

राजनेताओं का परिवार

भवानी एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य हैं, उनके पति एच.डी. रेवन्ना पूर्व मंत्री और होलेनरसीपुरा से मौजूदा विधायक हैं. उनके बड़े बेटे सूरज रेवन्ना हासन जिले से एमएलसी हैं और उनका छोटा बेटा, प्रज्वल, लोकसभा में हासन का प्रतिनिधित्व करता है.

गौड़ा ने प्रज्वल के लिए हासन की अपनी घरेलू सीट छोड़ दी और 2019 में पड़ोसी तुमकुरु से चुनाव लड़ा जिसमे वे हार गए इसके एक साल बाद, वह राज्यसभा के लिए चुने गए.

गौड़ा के दूसरे राजनीतिज्ञ बेटे, एच.डी. कुमारस्वामी, कर्नाटक के दो बार के मुख्यमंत्री और चन्नापटना से मौजूदा विधायक हैं. रामनगर से विधायक उनकी पत्नी अनीता कुमारस्वामी ने घोषणा की है कि वह 2023 के विधानसभा चुनाव में अपने इकलौते बेटे निखिल के लिए अपनी सीट छोड़ देंगी. निखिल 2019 के आम चुनाव में मांड्या से हार गए थे.

गौड़ा के परिवार के सदस्यों के पक्ष में लंबे समय से कार्यकर्ताओं की अनदेखी के बारे में पार्टी के भीतर असंतोष के लिए निखिल के भारी नुकसान को जिम्मेदार ठहराया गया था. पार्टी ने पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले नए उम्मीदवारों की तलाश भी शुरू की थी.

भवानी की उम्मीदवारी से गौड़ा परिवार के भीतर तनाव और बढ़ सकता है, जहां परिवार के दोनों भाई पार्टी पर नियंत्रण हासिल करके एक-दूसरे से आगे निकलना चाहते है.

वंशवाद में कोई पार्टी नहीं पीछे

कर्नाटक की राजनीति में वंशवाद का बोलबाला है. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई पूर्व मुख्यमंत्री एस.आर. बोम्मई के बेटे है. उनके पूर्ववर्ती बी.एस. येदियुरप्पा के बेटे बी.वाई. राघवेंद्र शिवमोगा के सांसद हैं. येदियुरप्पा ने अपने दूसरे बेटे और भाजपा के उपाध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के लिए 2023 के विधानसभा चुनाव में शिकारीपुरा सीट छोड़ने का फैसला किया है.

कांग्रेस भी पीछे नहीं है. सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र वरुणा से विधायक हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार कनकपुरा से विधायक हैं और उनके भाई डी.के. सुरेश बेंगलुरु ग्रामीण से सांसद हैं.

इस बीच, कुमारस्वामी ने सोमवार को कहा कि सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है. लेकिन प्रदेश में जाने वाले संदेश और पार्टी संगठन के प्रति सचेत रहते हुए उचित निर्णय लिया जाना चाहिए.

उन्होंने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘अन्य नेता भी वंशवाद की राजनीति करते हैं लेकिन निशाना केवल देवेगौड़ा के परिवार को बनाया जाता है.

एमएलसी और राज्य विधानसभा के ऊपरी सदन में जेडी(एस) के डिप्टी लीडर शरवाना ने दि प्रिंट को बताया, ‘भवानी की उम्मीदवारी पर पार्टी ने कहा है कि सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद फैसला लिया जाएगा. हासन जिले से संबंधित सभी मामलों पर, रेवन्ना और देवेगौड़ा निर्णय लेंगे और यह कुमारस्वामी का भी रुख है. कोई भी निर्णय (टिकट वितरण पर) सभी हितधारकों और स्थानीय नेताओं के साथ परामर्श के बाद और लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा.’


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