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आंध्र में नायडू-पवन कल्याण की बढ़ती दोस्ती- ‘जगन के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई’ से लेकर चुनावी गठबंधन तक’

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 तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और अभिनेता से नेता बने जनसेना पार्टी (जेएसपी) के पवन कल्याण ने रविवार को एक बंद कमरे में बैठक की. इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में उनके बढ़ते मेल-मिलाप और 2024 के विधानसभा चुनावों में संभावित गठबंधन को लेकर अटकलों का नया दौर शुरू हो गया है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की कथित निरंकुश कार्रवाइयों के खिलाफ लड़ाई में वे एक-दूसरे के साथ बने हुए हैं, यह जताने के लिए पिछले कुछ महीनों में दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक है. जेएसपी 2020 की शुरुआत से ही बीजेपी के साथ गठबंधन में है.

कल्याण और नायडू रविवार को हैदराबाद में नायडू के आवास पर मिले थे. पार्टियों के अनुसार, कल्याण पिछले सप्ताह जारी सार्वजनिक सभाओं और सड़कों पर सभाओं पर प्रतिबंध लगाने वाले सरकारी आदेश के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने के लिए अपना समर्थन देने गए थे. यह आदेश पिछले महीने की उस घटना का जिक्र करते हुए दिया गया था जिसमें कथित तौर पर नेल्लोर जिले में नायडू की जनसभा में 8 लोगों की मौत हो गई थी.

हालांकि अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी आदेश का पहला निशाना नायडू थे. पुलिस ने उनके निर्वाचन क्षेत्र कुप्पम में सभाओं को प्रतिबंधित कर दिया. इन सभाओं के कारण टीडीपी नेताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई थी.

पिछले हफ्ते नायडू ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर ‘निरंकुश’ व्यवहार का आरोप लगाया था और कुप्पम निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करने की अनुमति मांगी थी. लेकिन सरकारी आदेश के आधार पर इसे खारिज कर दिया गया था.

बैठक के बाद नायडू और कल्याण ने पत्रकारों से कहा कि चुनावी गठबंधनों को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई, लेकिन उन्होंने राज्य के लोकतंत्र की रक्षा करने और सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी की ‘अलोकतांत्रिक’ नीतियां के खिलाफ ‘एकजुट’ होकर लड़ने पर चर्चा की थी.

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टीडीपी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया, ‘किसी भी चुनावी गठबंधन पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई, उसके लिए अभी समय है. जहां तक कुछ मुद्दों का संबंध है, पवन कल्याण हमारी पार्टी के साथ काम करने के इच्छुक हैं और यही बात हमारे प्रमुख को पहले भी बताई गई थी. दोनों नेताओं के साझे रुझान है और जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर पहले से ही एक साथ काम कर रहे हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘फिलहाल तो एक साथ आना, जगन सरकार के खिलाफ मुद्दा आधारित लड़ाई है.’

बीजेपी कभी भी टीडीपी-जेएसपी गठबंधन के पक्ष में नहीं रही है और पार्टी के नेताओं ने कई मौकों पर इसका संकेत दिया है. टीडीपी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा थी. 2019 के विधानसभा चुनावों से पहले आंध्र को विशेष श्रेणी का दर्जा नहीं दिए जाने से वह इससे बाहर हो गई थी.

कल्याण-नायडू की पहली मुलाकात के कुछ हफ्ते बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल नवंबर में अपने विशाखापत्तनम दौरे के दौरान कल्याण से मुलाकात की थी. बंद कमरे में हुई बैठक के बाद कल्याण ने इस मामले की ज्यादा गहराई में जाए बिना सिर्फ इतना कहा था कि राज्य की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हुई है.

‘गठबंधन की ओर इशारा’

राजनीतिक विश्लेषक नागेश्वर राव ने कहा कि दोनों पार्टियां इन बैठकों के जरिए लोगों और अपने कार्यकर्ताओं को संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि आने वाले समय में वे गठबंधन कर सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक नेताओं के बीच रविवार की बैठक करीब दो घंटे तक चली.

राव ने कहा, ‘किसी मसले पर वे दोनों एक साथ हैं, यह बताने में 2 घंटे नहीं लगेंगे. यह सिर्फ 5 मिनट का काम है. जाहिर है कि उन्होंने राजनीति पर चर्चा की है. इस बैठक से मुझे जो समझ में आया है वह यह है कि दोनों पार्टियां गठबंधन के लिए राजी हो गई हैं. जब तक कुछ अपरिहार्य परिस्थितियां न हों, पार्टियां एक साथ चलेंगी … दो राजनीतिक नेता बिना किसी कारण के बैठक नहीं करते हैं या किसी ठोस राजनीति पर चर्चा नहीं करते हैं.’

उन्होंने आगे बताया, ‘टीडीपी और जेएसपी 2014 में एक साथ थे. वे 2019 के चुनावों के दौरान अलग हो गए. लेकिन अगर वे 2024 में दोबारा हाथ मिलाने जा रहे हैं तो उन्हें लोगों को उचित कारण बताना होगा. इसलिए वे लोगों के मन में यह धारणा बनाना चाहते हैं कि वे स्वार्थ के लिए हाथ नहीं मिला रहे हैं, बल्कि जगन के शासन (जिसे वे ‘निरंकुश’ कहते हैं) के खिलाफ एकजुट लड़ाई लड़ने के लिए हैं. और आखिर में यह एक गठबंधन बन जाएगा.’

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राव ने दावा किया कि ये बैठकें पार्टी कैडर के लिए एक संदेश भी हैं कि आने वाले समय में पार्टियां को मिलकर काम करना होगा और नेताओं के बीच तालमेल बिठाना होगा.

गठबंधन पर नायडू का रुख कभी भी निश्चित नहीं रहा है. यह हमेशा चुनाव के समय राजनीतिक स्थिति के हिसाब से बदलता रहा है. तेदेपा प्रमुख ने अतीत में अपनी पार्टी के नेताओं को यह भी संकेत दिया था कि पार्टी को सत्ता में आने के लिए कुछ त्याग करने होंगे. जाहिर तौर पर यह अन्य दलों के साथ सीट बंटवारे की जरूरत की ओर इशारा था.

टीडीपी नेता पट्टाबी राम ने कहा, ‘हमारे सीएम जगन को यह समझना होगा कि वह विपक्षी दलों को एक साथ आने के लिए (अपने निरंकुश शासन के जरिए) एक मंच बना रहे हैं. अगर यह सच हो जाता है तो उन्हें हैरानी नहीं होनी चाहिए.’

कल्याण और नायडू पहली बार पिछले साल अक्टूबर में मिले थे, जब कल्याण को पुलिस ने विशाखापत्तनम में एक होटल के कमरे में कैद कर दिया था और एक जन शिकायत कार्यक्रम आयोजित करने से रोक दिया गया था. पुलिस ने तब कहा था कि उन्होंने सत्तारूढ़ दल के नेताओं और मंत्रियों पर जेएसपी कार्यकर्ताओं द्वारा ‘हमले’ किए जाने की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की है.

नायडू ने तब कल्याण से मुलाकात की थी और एक साथ होने की बात कही थी.

एक अन्य टीडीपी नेता ने कहा, ‘जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को यह साफ हो गया है कि दोनों दल एक साथ काम कर रहे हैं. हाल ही में नंदीगामा में हमारी पार्टी की रैली में शामिल होने वाले जनसेना कार्यकर्ताओं को देखकर हम वास्तव में हैरान थे. अपने झंडों को हाथों में लिए उन्होंने हमारे लिए समर्थन की घोषणा की थी.’

‘कम्मा-कापू’ समुदायों की शक्ति

अगर नायडू-कल्याण का गठबंधन हो जाता है, तो यह एक शक्तिशाली ‘कम्मा-कापू’ गठबंधन होगा. नायडू सामाजिक रूप से प्रभावशाली कम्मा समुदाय से आते हैं और ये समुदाय हमेशा उनका अनुसरण करता है. हालांकि कापू नेता कल्याण के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता है. जब किसी एक पार्टी का समर्थन करने की बात आती है तो कापू समुदाय हमेशा विभाजित रहा है.

कापू समुदाय में बालिजा, तेलगा आदि शामिल हैं. पिछली जनगणना के अनुसार आंध्र की आबादी का लगभग 24 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं लोगों का है. यही वजह है कि सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी सहित हर पार्टी के लिए यह एक प्रमुख वोटबैंक है. कापू समुदाय की मांग है कि उन्हें राज्य के पिछड़े वर्ग में शामिल किया जाए.

हालांकि कापू बड़े पैमाने पर कांग्रेस के समर्थक रहे हैं. लेकिन 2009 के बाद से उनके वोटों का एकीकरण हुआ है. उस समय तेलुगु सुपरस्टार चिरंजीवी ने अपनी राजनीतिक पार्टी लॉन्च की थी. कल्याण चिरंजीवी के छोटे भाई हैं.

लेकिन कल्याण की अब तक की असफल यात्रा रही है. वह 2019 में दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव हार गए थे.

नायडू कल्याण को अपने साथ जोड़कर कापू वोटों का एक हिस्सा हासिल कर सकते हैं. वहीं कल्याण को टीडीपी जैसी अपेक्षाकृत मजबूत पार्टी के साथ गठबंधन से कुछ न्यूनतम लाभ मिल सकते हैं.

अब सवाल यह है कि क्या बीजेपी इस टीडीपी-जेएसपी गठबंधन के साथ होगी. और क्या 2024 में यह टीडीपी-बीजेपी-जेएसपी गठबंधन होगा या फिर सिर्फ टीडीपी-जेएसपी गठबंधन होकर रह जाएगा.

एक टीडीपी नेता ने कहा, ‘हमें भाजपा के साथ काम करने में कोई बड़ी आपत्ति नहीं है, लेकिन उस पार्टी को खुद को आंध्र के लोगों के सामने साबित करना होगा. वे अभी भी राज्य में मुद्दों पर कड़ा रुख नहीं अपना रहे हैं.

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