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असम का राज्यपाल बनते ही वसुंधरा पर क्या बोल गए कटारिया, जानें मामला

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राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाए जाने पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कटारिटा को जयपुर के सिविल लाइंस स्थित उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा। भाजपा के बड़े-बड़े नेता पहुंचे और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दीं। कटारिया ने कहा कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया था। उन्होंने हालचाल पूछा था। फिर सीधा राज्यपाल बना दिया। इस दौरान वसुंधरा राजे को लेकर कहा कि राजे भारतीय जनता पार्टी की लीडर हैं। दो बार मुख्यमंत्री रही हैं। पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। मैं सोचता हूं, उनकी भूमिका पहले भी थी, आज भी है, और आगे भी रहनी चाहिए।पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने ट्वीट किया- आज सुबह आदरणीय कटारिया जी के आवास पर पहुंचकर उन्हें इस नई व बड़ी जिम्मेदारी की बधाई दी तथा एक यशस्वी कार्यकाल की अग्रिम शुभकामनाएं भी दी।

बता दें करीब 5 दशक से राजस्थान की राजनीति में सक्रिय और 1977 से लगातार विधानसभा के लिए चुने जाने वाले गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाया गया है. राज्यपाल की जिम्मेदारी मिलने के बाद कटारिया ने कहा कि उनका कोई पारिवारिक सियासी बैकग्राउंड नहीं रहा और न ही वो बहुत पैसे वाले हैं, न उद्योगपति हैं. बावजूद इसके एक साधारण कार्यकर्ता पर उनकी पार्टी ने हमेशा विश्वास बनाए रखा। उनके जैसे एक साधारण कार्यकर्ता को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी, जिसका कर्ज चुकाने का वो जीवनभर प्रयास करेंगे।

कटारिया पहली बार 1977 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीते थे। अब तक वो आठ बार विधायक रहे चुके हैं. 1989 से 1991 तक नौवीं लोकसभा के भी सदस्य रहे. वे उदयपुर से लोकसभा का चुनाव जीते. उन्हें 27 मई 1999 को राजस्थान भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था और वो इस पद पर 19 जून, 2000 तक रहे. इसके अलावा वो 1977 से 1980 तक राजस्थान में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष व महासचिव भी रहे. वो 1980 से 1986 तक प्रदेश भाजपा के सचिव रहे. उन्हें प्रमोशन देकर 1986 में प्रदेश भाजपा का महासचिव बनाया गया था और वो इस पद पर साल 1993 तक बने रहे.

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