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अशोक गहलोत जीते या सचिन पायलट का दांव बाकी है? जानें सबकुछ

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राजस्थान में सीएम गहलोत और सचिन पायलट कैंप के बीच बयानबाजी का दौर जारी है। सचिन पायलट ने पांच जिलों में शक्ति प्रदर्शन इशारों में सीएम गहलोत के नेतृत्व को एक बार फिर चुनौती दी है। पायलट ने सीएम गहलोत से चार साल के कामकाज की रिपोर्ट मांग कर कड़े तेवर दिखाए है। पायलट ने कहा कि वसुंधरा सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए उन्होंने संघर्ष किया। लेकिन हमारी सरकार ने वसुंधरा सरकार में हुए घोटालों की जांच नहीं कराई। आरोपियों को सजा नहीं मिली। हमने जनता से वादे किए थे। पूरा नहीं हुए। पायलट ने पेपर लीक का मुद्दा उठाकर भी सीएम गहलोत को निशाने पर लिया। हालांकि, सचिन पायलट ने किसान सम्मेलन में सीएम गहलोत का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में निशाने पर सीएम गहलोत ही रहे। क्या गहलोत सरकार के सिर से संकट खत्म हो गया, या अभी पिक्चर बाकी है?। हालांकि, सचिन पायलट कहते रहे है कि वह सरकार रिपीट करने के लिए किसानों को कांग्रेस से जोड़ रहे हैं। 

\राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पायलट भले ही सीएम गहलोत से दो-दो हाथ कर रहे हैं, लेकिन सियासी संग्राम में गहलोत ने हर मौके पर अपना जादू दिखाया है। आंकड़े अब सीएम गहलोत के साथ दिखाई दे रहे हैं। 200 सीटों वाली विधानसभा में 121 विधायक गहलोत के साथ खड़े होने का दांवा कर रहे हैं। बहुमत के लिए 101 सीट चाहिए, उनके पास 20 से ज्यादा है, तो क्या उनकी सरकार के सिर से संकट खत्म हो गया। या अभी पिक्चर बाकी है? राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में होने है। चुनाव के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है। इसलिए पायलट कैंप की नेतृत्व परिवर्तन की मांग ठंडे बस्ते में दिखाई दे रही है। पार्टी आलाकमान चुनाव से पहले नेतृत्व परिवर्तन कर जोखिम नहीं लेना चाहता है। आलाकमान नहीं चाहता है कि राजस्थान में पंजाब जैसे हालात हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीए गहलोत अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। 

सचिन पायलट ने किसा सम्मेलन में सीएम गहलोत के साथ-साथ पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर भी जमकर निशाना साधा था। राजनीतिक जानकार पायलट के वसुंधरा राजे पर निशान साधने को लेकर अलग-अलग सियासी मायने निकाल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है वसुंधरा राजे कैंप की खामोशी ने सचिन पायलट की उड़ान पर ब्रेक लगा दिया। बता दें, पायलट ने वर्ष 2020 में बगावत कर गहलोत सरकार को संकट में डाल दिया था। पायलट कैंप के नेताओं को भरोसा था की बीजेपी की मदद से पायलट सीएम बन जाएंगे। लेकिन बीजेपी ने गहलोत-पायलट की लड़ाई को कांग्रेस का मामला बताकर पायलट से दूरी बना ली थी। विश्लेषकों का कहना है कि वसुंधरा राजे नहीं चाहती थीं कि पायलट बीजेपी के समर्थन से गहलोत सरकार गिराकर  मुख्यमंत्री बने। वसुंधरा राजे कैंप के विरोध के चलते पायलट मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शायद इसी वजह से पायलट वसुंधरा राजे पर इन दिनों हमलावर है।

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