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अब छोड़ चुका उड़ते तीतर लेना, ऐसा क्यों बोले गहलोत के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास

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राजस्थान के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि अब वह पुराने वाले प्रताप सिंह खाचरियावास नहीं रहे हैं और अब उड़ते तीतर लेना छोड़ दिया है। राजधानी जयपुर में मीडिया से बात करते हुए मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि अब चुनाव आ चुके हैं और वे सचिन पायलट, अशोक गहलोत या किसी अन्य नेता के न तो विरोध में हैं न ही समर्थन में हैं। उन्होंने साफ कहा कि मैं केवल कांग्रेस पार्टी के साथ हूं और कांग्रेस पार्टी चुनाव में जहां भी मेरा इस्तेमाल करना चाहे मैं उसके लिए तैयार हूं। मंत्री खाचरियावास ने कहा कि वो केवल कांग्रेस पार्टी के साथ हैं। क्योंकि सोनिया गांधी ने उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट उस समय दिया था जब भाजपा ने उन्हें हेलीकॉप्टर से धक्का दे दिया था। ऐसे में अब चाहे कांग्रेस पार्टी के लिए उन्हें सड़कों पर उतरकर धरने प्रदर्शन करने पड़े या कहीं भी चुनाव प्रचार करने जाना हो वो उसके लिए तैयार हैं।

 

उल्लेखनीय है कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास लंबे समय तक भाजपा की राजनीति का हिस्सा रहे, भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी रहें बने और वसुंधरा राजे के सबसे करीबी नेताओं में से एक माने जाते थे, लेकिन भाजपा ने उन्हें जयपुर से टिकट नहीं दिया. इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने साल 2004 में प्रताप सिंह को लोकसभा चुनाव में जयपुर से उम्मीदवार बनाया. भले ही प्रताप सिंह वो चुनाव हार गए लेकिन कांग्रेस पार्टी ने प्रताप सिंह पर भरोसा बरकरार रखा और उन्हें हर बार टिकट दिया।

 

प्रताप सिंह की उपयोगिता कांग्रेस पार्टी में कितनी है इसका पता इसी बात से चलता है कि 2004 से अब तक प्रताप सिंह खाचरियावास केवल 2 बार विधायक बने हैं लेकिन सभी वरिष्ठ नेताओं को पछाड़कर वो कैबिनेट मंत्री बनाए गए और आज वो कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता बन चुके हैं। ऐसे में अब मंत्री खाचरियावास ने किसी नेता विशेष की जगह कांग्रेस और गांधी परिवार के प्रति आस्था और भरोसा जताते हुए यह कहना शुरू कर दिया है कि जिस तरह से भाजपा ने उनका टिकट काटकर अपने हेलीकॉप्टर से धक्का दे दिया था वो उस भाजपा के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई में सबसे आगे मिलेंगे। वही फीडबैक बैठक के बाद मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने दोहराया की राजधानी जयपुर के दो हिस्से नहीं होंगे भले ही कलेक्टर दो बना दिए जाएं लेकिन जयपुर के दो टुकड़े नहीं किए जाएंगे।

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